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भाजपा का अभेद किला रही हरिद्वार विधान सभा में 2022 में भी हवा मदन के पक्ष में ,मदन कौशिक है जीत का बड़ा फैक्टर

हरिद्वार,उत्‍तराखंड : 2017 में हुए उत्‍तराखंड विधान सभा चुनाव में सीएम हरीश रावत के नेतृत्‍व में कांग्रेस को करारी हार का मुंह देखना पड़ा था। बीजेपी की ऐसी आंधी चली थी कि खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव हार गए थे। 2017 के ओपिनियन पोल्स के मुताबिक हरीश रावत सीएम के रूप में लोगों की पहली पसंद बने हुए थे। इस बीच रावत की लोकप्रियता में भारी इजाफा देखने को मिला था ।इस बार भी हरीश रावत सीएम के रूप में लोगों की पहली पसंद हैं।
हरिद्वार ज़िले में कुल 11 विधान सभा सीटें है जिसमे 8 पर भाजपा का कब्ज़ा है ,और तीन सीट कांग्रेस के पास है। उत्तराखंड बनने से पहले हरिद्वार यूपी के सहारनपुर जिले में समाहित रहा है मगर अब यह उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ है और उत्तराखंड राज्य को सर्वाधिक राजस्व देने वाला जिला है ।

विधान सभा सीट हरिद्वार :विधायक मदन कौशिक भारतीय जनता पार्टी

अगले साल होने वाले चुनाव में हरिद्वार विधानसभा सीट उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक है क्योंकि उत्तराखंड निर्माण के बाद हुए सभी चुनाव में भाजपा इस सीट से कभी नहीं हारी है । 2002 से मदन कौशिक यहाँ से विधायक है । मदन कौशिक उत्तराखंड में रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद खंडूरी और त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में मंत्री रह चुके है और वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं । 2002 मे पारस कुमार जैन कांग्रेस को 2992 वोट से हराकर पहली बार विधान सभा पहुंचे । 2007 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी के अमरीश कुमार को 28640 वोटों से पराजित करके लगातार दूसरी बार विधायक बने । 2012 के विधानसभा चुनाव में मदन कौशिक ने लगातार तीसरी बार इस सीट से जीत दर्ज की थी ,उन्होंने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सतपाल ब्रह्मचारी को 8620 हराया था। 2017 में मदन कौशिक ने कांग्रेस के ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी को 35,927 से हराकर ये सीट भाजपा के पास कायम रखी।

बजरंग दल से भारतीय जनता पार्टी में आए मदन कौशिक एक तेजतर्रार हिंदुत्व छवि के नेता है हरिद्वार सीट धर्म और अध्यात्म से जुड़ी होने के कारण यह एक संत बाहुल्य क्षेत्र है इस कारण यहां मतदाता भी हिंदूवादी विचारधारा के हैं इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण में संत समाज की काफी भागेदारी है हरिद्वार विधानसभा सीट पर सबसे अधिक ब्राह्मण मतदाता करीब 35% है जिसके कारण मदन कौशिक जातिगत समीकरण के लिहाज़ से भी फिट है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में उन्होंने राजनीति की शुरुआत की ।

विवादों से भी अछूते नहीं रहे है मदन कौशिक

हरिद्वार में 2010 में विधायक निधि से 16 पुस्तकालयों का निर्माण कराने के लिए पैसा आवंटित किया गया था. इनके निर्माण को लेकर उस समय भी विवाद हुआ था. घोटाले के आरोप भी लगे थे। हालाकिं हरिद्वार के जिलाधिकारी सी रविशंकर की ओर से हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि 41.70 लाख रुपये की विधायक निधि से बने 10 पुस्तकालय भवनों को हरिद्वार नगर निगम ने अपने हाथ में ले लिया और जनहित में इनका संचालन कर दिया गया है।रिपोर्ट में कहा गया कि मामला राजनीति से प्रेरित है और लोकप्रियता पाने के लिए दायर किया गया था ।मदन कौशिक एक मात्र ऐसे नेता है जिनका हर धर्म जाती में अपना वोट बैंक है हिन्दुत्वादी छवि के नेता होने के बावजूद हरिद्वार विधान सभा क्षेत्र में एक बड़ा मुस्लिम समुदाय उनका वोटर है वर्तमान में इस सीट से मदन कौशिक एक कदावर नेता है और यहाँ से भाजपा को हराना एक टेढ़ी खीर है। हालाकिं मदन कौशिक अब दिल्ली की राजनीति में जाने के इच्छुक है उनकी नज़र 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव पर है जिसके चलते 2022 में हरिद्वार विधान सभा में नया प्रत्याशी भी देखने को मिल सकता है।

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