Mirzapur The Movie ReviewImage Credit: YouTube

Mirzapur The Movie Review: पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु स्टारर फिल्म कैसी है? जानिए कहानी, एक्टिंग, एक्शन, डायलॉग्स, कमजोरियां और पूरी समीक्षा।

Mirzapur The Movie Review: कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना की वापसी ने मचाया भौकाल, कैसी है फिल्म?

Mirzapur The Movie Review: अमेजन प्राइम वीडियो की चर्चित क्राइम-थ्रिलर वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ के फैंस लंबे समय से इसके फिल्म वर्जन का इंतजार कर रहे थे। अब यह इंतजार खत्म हो गया है। ‘Mirzapur: The Movie’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और बड़े पर्दे पर एक बार फिर गुड्डू पंडित, कालीन भैया और मुन्ना त्रिपाठी की दुनिया देखने को मिल रही है।

फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु जैसे कलाकार अपने चर्चित किरदारों के साथ लौटे हैं। इसके अलावा रवि किशन, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी और अन्य कलाकार भी कहानी को आगे बढ़ाते हैं। सवाल यही है कि क्या छोटे पर्दे पर धमाल मचा चुकी ‘मिर्जापुर’ की दुनिया बड़े पर्दे पर भी दर्शकों को उतना ही रोमांचित कर पाती है?

Mirzapur The Movie की कहानी कैसी है?

‘Mirzapur: The Movie’ की कहानी उसी अपराध और सत्ता की दुनिया से आगे बढ़ती है, जिससे दर्शक वेब सीरीज के दौरान जुड़ चुके हैं। यहां सत्ता सिर्फ एक कुर्सी नहीं बल्कि प्रतिष्ठा, बदला और वर्चस्व का प्रतीक है। मिर्जापुर की गद्दी को हासिल करने की जंग एक बार फिर किरदारों के बीच टकराव पैदा करती है।

गुड्डू पंडित अपने पुराने अंदाज में नजर आते हैं। दूसरी तरफ कालीन भैया का शांत लेकिन खतरनाक व्यक्तित्व कहानी में तनाव बनाए रखता है। मुन्ना त्रिपाठी का किरदार भी फैंस के लिए बड़ा आकर्षण है।

फिल्म में नए किरदार और नए समीकरण भी दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पुराने रिश्तों में दरार और सत्ता के लिए नई चालें देखने को मिलती हैं। फिल्म की कहानी में एक्शन के साथ बदले और वर्चस्व का खेल लगातार चलता रहता है।

बड़े पर्दे पर कितना असरदार है ‘मिर्जापुर’ का भौकाल?

‘मिर्जापुर’ की सबसे बड़ी पहचान उसकी भाषा, हिंसा, कच्चे अंदाज और दमदार डायलॉग्स रहे हैं। फिल्म इन चीजों को बड़े पर्दे पर और ज्यादा भव्य तरीके से पेश करने की कोशिश करती है।

जहां वेब सीरीज में घटनाओं का विस्तार देखने को मिलता था, वहीं फिल्म का फोकस ज्यादा सिनेमाई अनुभव देने पर नजर आता है। एक्शन सीक्वेंस बड़े हैं और सिनेमाघर में उनका प्रभाव भी ज्यादा महसूस होता है।

फिल्म में कई ऐसे पल हैं जहां थिएटर में बैठे दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने लायक हो सकती है। खासकर पुराने किरदारों की एंट्री और उनके बीच होने वाली भिड़ंत फैंस के लिए खास अनुभव बनती है।

पंकज त्रिपाठी और अली फजल की एक्टिंग

कालीन भैया के किरदार में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। उनके किरदार की खासियत यह है कि वह ज्यादा शोर किए बिना भी स्क्रीन पर अपना दबदबा बनाए रखते हैं। उनकी संवाद अदायगी और बॉडी लैंग्वेज किरदार को मजबूत बनाती है।

अली फजल का गुड्डू पंडित भी फिल्म की जान है। गुड्डू के किरदार में पहले की तुलना में ज्यादा आक्रामकता और आत्मविश्वास नजर आता है। अली फजल ने एक ऐसे किरदार को पर्दे पर उतारा है जो परिस्थितियों के साथ लगातार बदलता रहा है।

वहीं दिव्येंदु की मुन्ना त्रिपाठी के रूप में वापसी फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है। मुन्ना का अंदाज, उसकी सनक और उसके डायलॉग आज भी ‘मिर्जापुर’ की पहचान का हिस्सा हैं।

रवि किशन ने बढ़ाया रोमांच

फिल्म में रवि किशन की मौजूदगी भी कहानी को एक अलग दिशा देती है। उनका किरदार पुराने समीकरणों के बीच नया पावर गेम शुरू करता है। रवि किशन अपने अनुभव के दम पर किरदार में देसी अंदाज और आक्रामकता लेकर आते हैं।

रसिका दुग्गल और श्वेता त्रिपाठी जैसे कलाकार भी अपनी भूमिकाओं में कहानी को आगे बढ़ाते हैं। हालांकि फिल्म का मुख्य आकर्षण पुराने और लोकप्रिय किरदार ही बने रहते हैं।

एक्शन और डायलॉग हैं बड़ी ताकत

अगर आप ‘मिर्जापुर’ को उसके एक्शन और डायलॉग्स के लिए पसंद करते हैं तो फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। गोलियों की आवाज, गैंगवार, हिंसा और दमदार वन-लाइनर्स कहानी में लगातार ऊर्जा बनाए रखते हैं।

बड़े पर्दे पर इन दृश्यों का स्केल वेब सीरीज से अलग महसूस होता है। सिनेमाघर में बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड डिजाइन भी एक्शन दृश्यों के प्रभाव को बढ़ाने का काम करते हैं।

कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका लंबा रनटाइम हो सकता है। तीन घंटे से ज्यादा की अवधि के कारण कुछ दर्शकों को कहानी कुछ जगहों पर खिंची हुई लग सकती है।

जो दर्शक ‘मिर्जापुर’ के तीनों सीजन से अच्छी तरह परिचित हैं, उनके लिए कहानी को समझना आसान रहेगा। लेकिन अगर आपने वेब सीरीज नहीं देखी है तो कई किरदारों और उनके रिश्तों को समझने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा फिल्म कई जगहों पर पुराने फॉर्मूले पर भी निर्भर दिखाई देती है। इसलिए अगर आप फ्रेंचाइजी से बिल्कुल नई और अलग कहानी की उम्मीद कर रहे हैं तो आपकी उम्मीद पूरी तरह पूरी नहीं हो सकती।

क्या ‘Mirzapur: The Movie’ देखनी चाहिए?

अगर आप ‘मिर्जापुर’ के फैन हैं तो इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना एक अलग अनुभव हो सकता है। पुराने किरदारों की वापसी, एक्शन, डायलॉग्स और सत्ता की लड़ाई फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं।

हालांकि फिल्म को देखने से पहले ‘मिर्जापुर’ के तीनों सीजन देख लेना बेहतर रहेगा। इससे किरदारों के रिश्ते और कहानी के कई संदर्भ ज्यादा आसानी से समझ आएंगे।

Mirzapur The Movie Review: हमारा फैसला

कुल मिलाकर ‘Mirzapur: The Movie’ फ्रेंचाइजी के फैंस के लिए एक मनोरंजक थिएटर एक्सपीरियंस है। फिल्म में वह देसी क्राइम ड्रामा, बदले की भावना और सत्ता का खेल मौजूद है जिसने ‘मिर्जापुर’ को लोकप्रिय बनाया।

पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु अपने-अपने किरदारों में मजबूत नजर आते हैं। रवि किशन फिल्म में नया रंग जोड़ते हैं। वहीं एक्शन और डायलॉग्स थिएटर में माहौल बनाने में कामयाब होते हैं।

कमजोरी की बात करें तो लंबा रनटाइम और कुछ जगहों पर कहानी की धीमी गति परेशानी पैदा कर सकती है। फिर भी अगर आप ‘मिर्जापुर’ के पुराने फैन हैं तो फिल्म आपको थिएटर तक खींचने की क्षमता रखती है।

रेटिंग: 4/5 ⭐

Bhool Bhulaiyaa 2 Movie Review: कार्तिक आर्यन और तब्बू ने जीता दिल

By M. S. Siddiqui

M. S. Siddiqui Prime News 24 के संपादक और मनोरंजन विषयों के लेखक हैं। वे बॉलीवुड, फिल्मों और एंटरटेनमेंट जगत से जुड़ी खबरों को सरल, रोचक और तथ्यपरक तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को बिना अनावश्यक जटिलता के भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।