Meethe Mein Kya Hai Movie Review in Hindi: रित्विक भौमिक और रोहिणी हट्टंगड़ी की फिल्म की कहानी, एक्टिंग, निर्देशन, खूबियां और कमियां जानें।
Meethe Mein Kya Hai Movie Story: क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी जय अग्रवाल (रित्विक भौमिक) के इर्द-गिर्द घूमती है। जय एक आर्किटेक्ट है, जिसकी पत्नी तारा की दो साल पहले एक कार दुर्घटना में मौत हो चुकी है। पत्नी के जाने के बाद जय की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। वह अब तक इस दुख से बाहर नहीं निकल पाया है और धीरे-धीरे अपने परिवार से भी दूरी बना चुका है।
दीवाली के मौके पर जय की नानी के घर लखनऊ में पूरा परिवार इकट्ठा होने वाला है। लेकिन जय इस पारिवारिक मिलन में शामिल होने से मना कर देता है। तभी उसकी बहन सना उसे फोन करके एक ऐसी बात बताती है, जिसके बाद जय को अपना फैसला बदलना पड़ता है।
सना ने चुपचाप शादी कर ली है और अब वह चाहती है कि जय दीवाली के मौके पर मौजूद रहे, ताकि वह अपने पति करम को परिवार से मिलवा सके।
जय अनिच्छा के बावजूद लखनऊ पहुंच जाता है। यहां उसकी मुलाकात अपनी मां अमृता, पिता अजय, मामी प्रीति, मामा ऋषभ और परिवार के दूसरे सदस्यों से होती है।
इसी दौरान जय की मुलाकात उसकी नानी की 13 साल की पड़ोसी मीरा से होती है। दोनों के बीच एक अनोखी दोस्ती शुरू होती है। मीरा का व्यवहार और उसका मासूम अंदाज जय की जिंदगी में एक नई ऊर्जा लेकर आता है।
कुछ समय बाद सना अपने पति करम के साथ परिवार के सामने आती है। इसके बाद घर में कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद, भावनात्मक बातचीत और मजेदार घटनाएं कहानी को आगे बढ़ाती हैं।
आगे चलकर परिवार के पुराने मुद्दे भी सामने आते हैं। जय को अपने अतीत, रिश्तों और जिंदगी में आगे बढ़ने के बारे में सोचने का मौका मिलता है। फिल्म की बाकी कहानी इसी पारिवारिक मिलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आधारित है।
Meethe Mein Kya Hai Movie Review: कैसी है फिल्म की पटकथा?
राधिका बंसल की कहानी सरल और भावनात्मक है। फिल्म में परिवार के सदस्यों के बीच होने वाली बातचीत और उनके व्यवहार को काफी हद तक वास्तविक रखने की कोशिश की गई है।
फिल्म की पटकथा में कॉमेडी और इमोशन का संतुलन देखने को मिलता है। खासकर करम के परिवार में आने के बाद जो घटनाएं होती हैं, वे दर्शकों को हंसाने में सफल रहती हैं।
मीरा का बातचीत के दौरान अनजान बनने का अंदाज भी काफी मजेदार है। फिल्म में ऐसे कई छोटे-छोटे पल हैं, जो कहानी को मनोरंजक बनाते हैं।
हालांकि, कुछ जगहों पर पटकथा कमजोर पड़ती है। कुछ घटनाएं कहानी में स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने के बजाय जबरदस्ती जोड़ी हुई महसूस होती हैं।
नानी को अकेले रहने के बजाय जयपुर शिफ्ट करने की परिवार की जिद कहानी में कुछ खास प्रभाव नहीं डालती। इसी तरह जय का मीरा के साथ उसकी दोस्त के घर जाना भी अचानक आता है।
ये दृश्य अपने आप में अच्छे हैं, लेकिन कहानी के मुख्य हिस्से से पूरी तरह जुड़े हुए नहीं लगते।
Meethe Mein Kya Hai Movie Review: निर्देशन और संवाद
राधिका बंसल ने इस फिल्म के जरिए निर्देशन की दुनिया में कदम रखा है। पहली फिल्म होने के बावजूद उनका काम काफी अच्छा है।
फिल्म में कॉमेडी को जरूरत से ज्यादा बढ़ाने की कोशिश नहीं की गई है। यही वजह है कि कई मजेदार दृश्य स्वाभाविक लगते हैं।
निर्देशक ने पारिवारिक रिश्तों को समझने और उनकी भावनाओं को पर्दे पर उतारने की अच्छी कोशिश की है। फिल्म के संवाद भी वास्तविक जिंदगी से जुड़े हुए महसूस होते हैं।
हालांकि, कुछ घटनाओं को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता था। फिल्म में दूध, वाइन और तेल गिरने जैसे दृश्य कहानी के वास्तविक माहौल से थोड़े अलग महसूस होते हैं। ऐसे पल फिल्म की गंभीरता को कम करते हैं।
फिल्म का एक गाना ‘इचक दाना बिचक दाना’ भी कहानी के प्रवाह में थोड़ा अटपटा लगता है।

Meethe Mein Kya Hai Movie Review: कलाकारों की एक्टिंग
फिल्म में रित्विक भौमिक ने जय अग्रवाल का किरदार निभाया है। उनका अभिनय कहानी के भावनात्मक हिस्से को मजबूत बनाता है। पत्नी को खोने के बाद एक व्यक्ति किस तरह खुद को दुनिया से अलग कर लेता है, इसे उन्होंने अच्छी तरह प्रस्तुत किया है।
रोहिणी हट्टंगड़ी नानी के किरदार में प्रभावशाली नजर आती हैं। उनका अनुभव और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूती देता है।
आयशा रजा ने अमृता के किरदार में अच्छा काम किया है। वहीं परिवार के दूसरे कलाकार भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं।
शिविका ऋषि का मीरा वाला किरदार कहानी में ताजगी लेकर आता है। जय और मीरा की दोस्ती फिल्म के सबसे प्यारे हिस्सों में से एक है।
फिल्म की कास्टिंग कहानी के अनुरूप है और कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री इसे एक वास्तविक पारिवारिक माहौल देती है।
Meethe Mein Kya Hai Movie Review: फिल्म की खूबियां और कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी सरल कहानी और भावनात्मक जुड़ाव है। परिवार के साथ बैठकर देखने वाली फिल्मों में जिस तरह का मनोरंजन होना चाहिए, वह यहां काफी हद तक मौजूद है।
फिल्म का 119 मिनट का रनटाइम भी इसकी एक अच्छी बात है। कहानी ज्यादा लंबी नहीं खिंचती और दर्शकों को बोर होने का मौका कम मिलता है।
इसके अलावा फिल्म में हास्य और भावनाओं का संतुलन अच्छा है। कई दृश्य ऐसे हैं जिनसे दर्शक अपने परिवार और रिश्तों को जोड़कर देख सकते हैं।
दूसरी तरफ, कुछ घटनाएं जबरदस्ती जोड़ी हुई महसूस होती हैं। कुछ दृश्य कहानी की गति को प्रभावित करते हैं। फिल्म की पटकथा थोड़ी और मजबूत होती, तो इसका प्रभाव ज्यादा बेहतर हो सकता था।
Meethe Mein Kya Hai Movie Review: देखें या नहीं?
अगर आपको परिवार, रिश्तों और भावनाओं पर आधारित फिल्में पसंद हैं, तो ‘मीठे में क्या है’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
यह फिल्म बड़े स्तर का ड्रामा या जबरदस्त मनोरंजन देने का दावा नहीं करती, बल्कि छोटे-छोटे पलों के जरिए दर्शकों के दिल तक पहुंचने की कोशिश करती है।
फिल्म में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन इसकी सरल कहानी, कलाकारों का अभिनय और भावनात्मक दृश्य इसे देखने लायक बनाते हैं।
हमारी राय: ‘मीठे में क्या है‘ एक हल्की-फुल्की और दिल को छूने वाली पारिवारिक फिल्म है। इसे परिवार के साथ देखा जा सकता है।
रेटिंग: 3/5 स्टार
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M. S. Siddiqui Prime News 24 के संपादक और मनोरंजन विषयों के लेखक हैं। वे बॉलीवुड, फिल्मों और एंटरटेनमेंट जगत से जुड़ी खबरों को सरल, रोचक और तथ्यपरक तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को बिना अनावश्यक जटिलता के भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।

