Nakhrewaalii Movie Review in Hindi: अनश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव की फिल्म नखरेवाली की कहानी, अभिनय, निर्देशन, खूबियां, कमजोरियां और रेटिंग जानें।
Nakhrewaalii Movie Review in Hindi: फिल्म की कहानी, अभिनय और निर्देशन का पूरा विश्लेषण
बॉलीवुड में कॉमेडी और रोमांस पर आधारित फिल्मों की कमी नहीं है, लेकिन जब किसी कहानी में प्यार, सरकारी नौकरी और पहचान बदलने जैसी परिस्थितियों को शामिल किया जाता है, तो दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ना स्वाभाविक है। 30 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई फिल्म ‘नखरेवाली’ (Nakhrewaalii) भी कुछ इसी तरह की अलग कहानी लेकर आई है।
अनश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म एक ऐसे युवक की कहानी दिखाती है, जो प्यार पाने और शादी करने के लिए ऐसा रास्ता चुनता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है और इसमें कॉमेडी के कई मौके मौजूद हैं। हालांकि, कमजोर पटकथा और कुछ अधूरे भावनात्मक दृश्यों के कारण फिल्म अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाती। आइए जानते हैं कि आखिर नखरेवाली दर्शकों का मनोरंजन करने में कितनी सफल होती है।
Nakhrewaalii Movie Story: क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी हरदोई में रहने वाले सुमित मिश्रा (अनश दुग्गल) से शुरू होती है। सुमित अपनी गर्लफ्रेंड स्वीटी से बेहद प्यार करता है, लेकिन उसकी जिंदगी में उस समय बड़ा बदलाव आता है, जब स्वीटी उसे छोड़कर एक इंजीनियर से शादी कर लेती है।
दिल टूटने के बाद सुमित दिल्ली जाने का फैसला करता है। उसका मकसद आगे की पढ़ाई करना और अपनी जिंदगी को नए अंदाज में शुरू करना है। साथ ही वह खुद को एक प्लेबॉय के रूप में भी देखना चाहता है।
दिल्ली पहुंचने के बाद सुमित बटुक (गोपाल दत्त) के घर में किराए पर रहने लगता है। बटुक अपनी पत्नी रेखा (कनुप्रिया शंकर पंडित) और 22 वर्षीय बेटी परिधि (प्रगति श्रीवास्तव) के साथ रहता है।
कुछ ही समय में सुमित और परिधि के बीच अच्छी दोस्ती हो जाती है। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल जाती है। सुमित परिधि से शादी करने का फैसला करता है और अपने इस इरादे के बारे में उसके माता-पिता को भी बता देता है।
लेकिन यहां कहानी में एक नया मोड़ आता है। परिधि के पिता बटुक शादी के लिए एक शर्त रख देते हैं। उनका कहना है कि अगर सुमित एक महीने के भीतर सरकारी नौकरी हासिल कर लेता है, तभी वह इस रिश्ते को मंजूरी देंगे। अन्यथा परिधि की शादी किसी दूसरे लड़के से कर दी जाएगी।
सुमित सरकारी नौकरी पाने के लिए काफी कोशिश करता है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती। आखिरकार वह एक ऐसा कदम उठाता है, जो फिल्म की कहानी को पूरी तरह बदल देता है।
वह महिला का रूप धारण करके अपनी नई पहचान ‘सुमिता’ बना लेता है। इस पहचान की मदद से उसे डाक सेवा विभाग में जूनियर पब्लिक रिलेशन ऑफिसर की नौकरी मिल जाती है।
अब सवाल यह है कि सुमित अपनी असली पहचान को कब तक छिपा पाएगा? क्या उसका यह अनोखा तरीका उसे परिधि से शादी करने में मदद करेगा? इन्हीं सवालों के जवाब फिल्म के बाकी हिस्से में मिलते हैं।

Nakhrewaalii Movie Review: कैसी है फिल्म की पटकथा?
नखरेवाली की कहानी सत्य व्यास की किताब ‘दिल्ली दरबार’ पर आधारित है। फिल्म का मूल विचार काफी मनोरंजक है और इसमें कॉमेडी, रोमांस तथा सामाजिक परिस्थितियों को एक साथ जोड़ने की अच्छी संभावना दिखाई देती है।
हालांकि, लेखक दिव्य निधि शर्मा की पटकथा कई जगह कमजोर पड़ जाती है। फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य हैं, जिनसे दर्शकों को भावनात्मक रूप से जुड़ने का मौका मिल सकता था, लेकिन उनका प्रभाव अपेक्षा के अनुसार नहीं बन पाता।
पहले हाफ में कॉमेडी के कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन ज्यादातर जगह हंसी पैदा करने में फिल्म सफल नहीं हो पाती। इंटरवल के बाद कहानी में थोड़ी तेजी आती है और कुछ मजेदार परिस्थितियां देखने को मिलती हैं।
फिल्म के संवादों में हास्य पैदा करने की कोशिश नजर आती है। कुछ संवाद अच्छे लगते हैं, लेकिन पूरी फिल्म में एक जैसी मनोरंजक गुणवत्ता बनाए रखना मुश्किल साबित होता है।
निर्देशन और सिनेमाई प्रस्तुति
राहुल शंकल्या का निर्देशन औसत से बेहतर कहा जा सकता है। फिल्म की अवधि लगभग 129 मिनट है और निर्देशक ने कहानी को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने से बचाया है।
दूसरे भाग में कहानी का मनोरंजक पक्ष ज्यादा मजबूत होता है। सुमित का अपने ऑफिस में एनएसडी के कलाकारों को बुलाना और परिधि का सुमित के कमरे में आकर मिहिका (आयुषी वर्मा) को संभालना जैसे दृश्य फिल्म में कुछ अच्छी कॉमेडी लेकर आते हैं।
शादी के ट्रायल के दौरान परिधि और सुमिता के बीच बनने वाला रिश्ता भी देखने लायक है। इसके अलावा मिहिका के घर में सुमित और उसके पिता राय जयचंद (कुमुद मिश्रा) के बीच होने वाली बातचीत कहानी में कुछ दिलचस्प समानताएं पैदा करती है।
फिर भी फिल्म का निर्देशन हर जगह प्रभावशाली नहीं रहता। खासकर भावनात्मक दृश्यों में वह गहराई नजर नहीं आती, जिसकी कहानी को जरूरत थी।
Nakhrewaalii Movie Acting: कलाकारों का अभिनय कैसा है?
अनश दुग्गल ने सुमित और सुमिता के दोहरे व्यक्तित्व को निभाने की कोशिश की है। उनका किरदार फिल्म की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। हालांकि, किरदार के व्यवहार और भावनात्मक बदलाव को जिस तरह लिखा गया है, उसके कारण दर्शकों के लिए उससे पूरी तरह जुड़ना मुश्किल हो जाता है।
प्रगति श्रीवास्तव परिधि के किरदार में ठीक नजर आती हैं। उनकी और अनश दुग्गल की जोड़ी में कुछ अच्छे पल देखने को मिलते हैं, लेकिन रोमांटिक केमिस्ट्री को और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था।
गोपाल दत्त अपने अनुभव के अनुसार बटुक के किरदार में अच्छे लगते हैं। कनुप्रिया शंकर पंडित भी अपनी भूमिका को सहज तरीके से निभाती हैं।
कुमुद मिश्रा और आयुषी वर्मा की मौजूदगी फिल्म को सहारा देती है। खासकर दूसरे हाफ में इन कलाकारों से जुड़े कुछ दृश्य कहानी को मनोरंजक बनाते हैं।
फिल्म की खूबियां और कमजोरियां
- फिल्म की खूबियां:
- कहानी का मूल कॉन्सेप्ट दिलचस्प है।
- दूसरे हाफ में कॉमेडी बेहतर हो जाती है।
- फिल्म की अवधि नियंत्रित रखी गई है।
- कुछ सहायक कलाकारों का अभिनय अच्छा है।
- शादी के ट्रायल और ऑफिस से जुड़े कुछ दृश्य मनोरंजक हैं।
फिल्म की कमजोरियां:
- पहले हाफ में हास्य का प्रभाव कमजोर है।
- पटकथा में भावनात्मक गहराई की कमी है।
- मुख्य किरदार का बदलाव स्वाभाविक नहीं लगता।
- दूसरे हाफ में फिल्म की समानता ‘ड्रीम गर्ल’ से महसूस होती है।
- क्लाइमैक्स अपेक्षाकृत आसान और कम प्रभावशाली है।
क्या Nakhrewaalii Dream Girl जैसी फिल्म है?
नखरेवाली की सबसे बड़ी चुनौती इसकी तुलना आयुष्मान खुराना की फिल्म Dream Girl से होना है। दोनों फिल्मों में पुरुष किरदार की महिला पहचान और उससे पैदा होने वाली हास्य परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नखरेवाली शुरुआत में अपने अलग कॉन्सेप्ट के कारण उत्सुकता पैदा करती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसकी कुछ परिस्थितियां पहले देखी गई फिल्मों की याद दिलाने लगती हैं।
इस वजह से फिल्म अपनी मौलिकता का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। खासकर क्लाइमैक्स में जिस भावनात्मक प्रभाव की उम्मीद होती है, वह भी पूरी तरह सामने नहीं आता।
Nakhrewaalii Movie Verdict: देखें या नहीं?
कुल मिलाकर नखरेवाली एक अच्छे विचार पर बनी ऐसी रोमांटिक कॉमेडी है, जो अपनी कमजोर पटकथा के कारण औसत मनोरंजन तक ही सीमित रह जाती है। फिल्म का दूसरा हाफ पहले भाग से बेहतर है और कुछ दृश्य दर्शकों को हंसाने में सफल होते हैं।
अगर आप हल्की-फुल्की कॉमेडी और रोमांटिक कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो इसे एक बार देखने के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन अगर आप दमदार पटकथा, जबरदस्त कॉमेडी और मजबूत भावनात्मक कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको थोड़ा निराश कर सकती है।
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M. S. Siddiqui Prime News 24 के संपादक और मनोरंजन विषयों के लेखक हैं। वे बॉलीवुड, फिल्मों और एंटरटेनमेंट जगत से जुड़ी खबरों को सरल, रोचक और तथ्यपरक तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को बिना अनावश्यक जटिलता के भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।

