July 9, 2026

Stock Market Crash: सेंसेक्स 1,700 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 23,900 के नीचे, जानिए बाजार में बिकवाली की 5 बड़ी वजहें

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Stock Market Crash Today

Image Credit: Grow

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जानिए ट्रंप के बयान, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक बाजारों की गिरावट का शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा।

Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, जानिए बाजार क्यों टूटा?

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए बेहद निराशाजनक रहा। दोपहर तक बाजार में बिकवाली इतनी तेज हो गई कि प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस तेज गिरावट से कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।

बाजार की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इन सभी कारणों का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

दोपहर तक बाजार का क्या रहा हाल?

दोपहर करीब 2:20 बजे तक सेंसेक्स करीब 1,784 अंक टूटकर 76,396 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी 50 भी लगभग 541 अंकों की गिरावट के साथ 23,900 के नीचे फिसल गया।

इस दौरान बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भी तेजी से घटा और लाखों करोड़ रुपये का बाजार मूल्य कुछ ही घंटों में कम हो गया। बाजार में लगभग हर सेक्टर दबाव में नजर आया और अधिकांश शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा?

आज की गिरावट में बैंकिंग, एफएमसीजी, ऑयल एंड गैस और ऑटो सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।

इंडिया VIX, जिसे बाजार में डर और अस्थिरता का संकेतक माना जाता है, उसमें भी लगभग 26 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता काफी बढ़ गई है।

एनएसई पर भी बाजार की चौड़ाई कमजोर रही, जहां बढ़ने वाले शेयरों की तुलना में गिरने वाले शेयरों की संख्या कई गुना अधिक रही।

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बाजार में गिरावट की 5 सबसे बड़ी वजहें

1. अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा

बाजार में सबसे बड़ा झटका अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से लगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई। निवेशकों को डर है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर साफ दिखाई देता है।

2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

ब्रेंट क्रूड लगभग 5 प्रतिशत चढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी तेजी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है।

3. वैश्विक बाजारों में कमजोरी

भारतीय बाजार पर विदेशी बाजारों का भी सीधा असर पड़ा। यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली, जबकि एशियाई बाजार भी दबाव में रहे।

जब वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है तो उसका असर उभरते बाजारों पर भी पड़ता है। इसी कारण भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ गई।

4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी

अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से वैश्विक निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं।

10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया। इससे उभरते बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव भी बढ़ सकता है।

5. रुपये में कमजोरी

डॉलर की मजबूती और महंगे कच्चे तेल के कारण भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। कमजोर रुपये से आयात महंगा हो जाता है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी कुछ हद तक प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपये पर दबाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर कई सेक्टरों की कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ सकता है।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही?

आज के कारोबार में कई बड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। बैंकिंग, ऑटो, एफएमसीजी और एविएशन सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में दो से चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

इसके अलावा डिफेंस और टेलीकॉम सेक्टर के कई शेयर भी बिकवाली की चपेट में रहे।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराहट में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए।

यदि अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है तो बाजार में अस्थिरता कुछ समय तक बनी रह सकती है। हालांकि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, बेहतर कॉरपोरेट आय और लंबी अवधि के विकास की संभावनाएं अभी भी सकारात्मक मानी जा रही हैं।

दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह समय अच्छी कंपनियों पर नजर रखने और चरणबद्ध निवेश करने का हो सकता है। वहीं इंट्राडे और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को जोखिम प्रबंधन के साथ कारोबार करने की सलाह दी जा रही है।

आगे बाजार की दिशा कैसी रह सकती है?

Stock Market Crash: विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर रहेगी।

यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की खरीदारी वापस शुरू होती है, तो भारतीय बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन यदि भू-राजनीतिक स्थिति और बिगड़ती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

फिलहाल निवेशकों के लिए संयम बनाए रखना, मजबूत कंपनियों पर फोकस करना और पर्याप्त जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

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